40 वर्षों से केवल 2 रूपये में मरीजों का इलाज करता है यह डॉक्टर :थीरुवेंगडम वीराराघवन

Dr.Thiruvengadam veeraraghavan
महंगाई के इस दौर में आपने देखा होगा कि जो बड़े बड़े डॉक्टर होते हैं वह इलाज के नाम पर अपनी फीस मैं बड़ी रकम वसूलते हैं। लेकिन ऐसे दौर में एक ऐसा डॉक्टर भी है जो केवल ₹2 लेकर इलाज करता है।
मतलब उसकी फीस होती है ₹2 और वह ₹2 में ही इलाज करता है हम बात कर रहे हैं तमिलनाडु के थीरुवेंगडम वीराराघवन । थीरुवेंगडम वीराराघवन चेन्नई के एक छोटे से उपनगर व्यासारपादी में रहते हैं। आइए जानते हैं उनकी पूरी कहानी क्या है कैसे उन्होंने शुरुआत की और किन-किन परेशानियों से उनको गुजरना पड़ा।
थीरुवेंगडम वीराराघवन का जन्म सन 1950 में हुआ था। थीरुवेंगणम वीरा राघवन कहते हैं कि उन्होंने 70 के दशक में चेन्नई के स्टैंनले मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और मद्रास मेडिकल कॉलेज से प्रशिक्षण पूरा किया। उनके लिए अच्छी बात यह रही कि उस समय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के कामराज की बेहतर नीतियों की वजह से उन्हें बिना किसी खर्च के मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने में मदद मिली। 




  पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना पैसा व्यासारपादी तमिलनाडु के एक छोटे से उपनगर में शुरू की जहां उन्होंने सामान्य फीस ₹2 में मरीजों का इलाज करना शुरू किया हालांकि बाद में उन्हें मरीजों के कहने के कारण ₹5 तक अपनी फीस बढ़ाने पड़ी। फीस कम लेने की वजह से उनके आसपास के जितने भी डॉक्टर थे , वह सभी उन पर दबाव डालते थे , ज्यादा फीस लेने का उस समय उनके आसपास के डॉक्टर कम से कम ₹100 से ज्यादा फीस वसूलते थे। लेकिन वह ₹2 की फीस वसूलते थे ।इस की सबसे बड़ी वजह थी , कि वह मरीजों की दयनीय हालत देखकर अपनी फीस बढ़ाना नहीं चाहते थे। दरअसल जिस इलाके में थीरुवेंगणम वीरा राघवन रहते थे , उस इलाके में प्राकृतिक कारणों और कई अन्य कारणों के कारण गरीब लोग ज्यादा रहते थे इसी कारण वह हमेशा उनकी सेवा में लगे रहते थे और उन से फीस भी कम लेते थे। उन्हें यह सब करना बहुत ही अच्छा लगता था उन्हें लगता था कि इंसानियत के नाते उन्हें यह सब करना चाहिए।

जब वह मद्रास मेडिकल कॉलेज से अपना प्रशिक्षण ले रहे थे तो उन्होंने इसका पूरा प्रशिक्षण लिया था , कि मरीजों की मरहम पट्टी घाव को भर आव कैसे किया जाता है और इसके अलावा कई सारे ट्रीटमेंट उन्होंने मद्रास मेडिकल कॉलेज से सीखे थे जो उनकी यहां हेल्प करता था। 




जब उनका चयन एसोसिएट फेलो इन इंडस्ट्रियल हेल्थ (AFIH) मैं हुआ तो उन्हें अपनी आय की चिंता नहीं थी क्योंकि उनकी आए वहां से हो जाती थी और यहां वह गरीबों की सेवा करते थे। उन्होंने ₹2 वाले काम को इसलिए जारी रखा क्योंकि वह मानते थे कि यह काम करने से गरीबों की सेवा करने से उन्हें अपनी कमाई के लिए ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ता था।

 लगभग 40 वर्ष से वह अपना क्लीनिक एरुकांचेरी में चलाते हैं वह सुबह 8:00 बजे से रात के 10:00 बजे तक अपने क्लीनिक में काम करते हैं उसके बाद वह अपने निवास स्थान व्यासारपादी मैं मरीजों को देखते हैं और कभी-कभी तो वह आधी रात से भी ज्यादा देर तक मरीजों की सेवा करते रहते हैं।

थीरुवेंगडम वीराराघवन आगे कहते हैं कि आज उनकी उम्र 67 वर्ष की हो गई है फिर भी वह लगातार मरीजों की सेवा करते रहते हैं। उनका सपना है कि वह व्यासारपादी में एक ऐसा अस्पताल खोलें जहां वहां के लोगों का गरीब तबके के लोगों का मुफ्त में इलाज कर सकें।

थीरुवेंगडम वीराराघवन से प्रेरणा लेकर उनके बच्चों ने भी यही पैसा अपनाया है। उनकी बेटी प्रीति और उनका बेटा प्लीज दीपक दोनों मॉरिशस में डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी कर के प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं।

दोस्तों यह थी एक ऐसे डॉक्टर की कहानी जो केवल ₹2 में लगभग 40 वर्षों से मरीजों की सेवा करता आ रहा है ।आपको यह कहानी कैसी लगी हमें कमेंट करके जरुर बताइएगा अगर आपको लगता है , कि यह कहानी शेयर की जानी चाहिए तो अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिएगा।
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